Monday, July 19, 2010

अंतर्द्वंद- दशा एक देश की... दिशा एक देश की

अंतर्द्वंद- दशा एक देश की... दिशा एक देश की






पिछले
कुछ दिनों हमने एक बार फिर काश्मीरइ को धधकते हुए देखा। इस समय करीब सात प्रदेश नक्सल वाद से प्रभावित है जबकि भारत के पूर्वी राज्य के लोग सालों से अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहे है ! इस २८ में से १५ राज्य अंतर द्वंध...इन अंतर द्वन्द को छोर दे देश तो भारत देश की जनता को कभी जाती तो कभी धर्म और कभी भाषा के नाम पर उकसाया गया है...आजादी के ६० साल इस तरह की खतरनाक स्तिथि सोचने पर मजबूर करती है की कही कुछ गड़बड़ है ! २०१० चल रहा है और भारत एक उभरती हुई अर्थ व्यवस्था के रूप में देखि जा रही है तो कुछ सवाल भी उठाते है की ये क्या चल रहा है तो जवाब आता है यही भारत है..चाहे इसे नेताओं ,चाहे भ्रस्त अधिकारीयों या अनपढ़ जनता को दे...चलता है , कौन ध्यान देता है खास्स्कर वो लोग जो शहरों में रह रहे है उनको इस १५ समस्यों से कोई प्रभाव पद रहा है और ही उनका कोई लेना देना है ....नक्सालियों ने अभी तक किसी पांच सितारा होटल पर आक्रमण किया है और ही किसी सतातीं पर (जैसा मुंबई में करीब साल पहले आतंकवादियों ने किया था ) और पूर्वी राज्यों की कौन सोचें वो तो काफी दूर है .....सवाल ये भी उठता है की ये सब गतिविधयां हमें किस दिशा में ले जायेंगी ......सच तो यह है की उदारीकरण के बाद भी आज सुविधाएं सभी भारतियों को नहीं पहुच पा रही है .....ये केवल १० प्रतिसत लोग तक पहुच रही जब की ९० % लोग आज भी इस से काफी दूर है ....सचाई यही है वे किसी advertiser sका टार्गेट ग्रुप नहीं है तो तो उनकी कोई आवाज है और यहाँ तकmedia ko भी उनकी आवाज़ नहीं सुनना चाहता है ....बाकी काम उनकी जाती और भेद भाव पूरी कर देती है तो उनके पास नौकरी के अवसर है और ऊपर से ये SOCIAL WELFARE SCHEMES JO KI भ्रस्ताचार का ठिकाना बन गयी है......ये उस दिशा में जा रही है जिसका गुस्सा abhi में रहने वाले लोग नहीं समझ पायेंगे और शायद काफ्फी देर हो जाए अगर sarkaar सही रास्ता नहीं akhtiyaar kari है..शायद यही कारण है एक जवान आदमी जिसके सामने पूरी जिंदगी पड़ी है बन्दूक उठाने को मजबूर हो जाते है ! अभी तो हम इसमें उलझे है की CRPF काफी है नक्सल वाद से निपटने के लिए या ARMY ko भी इस्म्मे सामिल करना पड़ेगा ...विडम्बना ये है की हम crocin khilane per lage hai jab ki jarrorat antibiotics ki hai ......जब तक ये गों के लोग और जवान लोग को अच्छा जीवन नहीं दिही देगा तब तक ये दिक्कतें आएँगी और बढती जायेंगी ....तो क्या कर सकते है इसको रोकने के लिए ..सहर और गाँव के बीच में आदान प्रदान बढ़ाना होगा ......बहुत पढ़े लिखे लोग सहर में है जबकि आज भी वो पूरी जसंखाया का छोटा हिस्सा है ...हर छात्र कुछ समय गाँव में बिताये और कुछ samay baad सहर गाँव की समझ sahari सामाज में ले कर आये ..बड़ी बड़ी कंपनी छोटे सहर में रहने के लिए अच्चा package दे सकती है ....कोई और रास्ता नहीं है .....ये मेरा हरदमmanana rahi है की regional imbalance ही समस्यों को जनम देती है...aur ko suljhane ka ek hi raasta hai -balance regional development...

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